भोजन और स्वास्थ्य

भोजन और स्वास्थ्य

भोजन और स्वास्थ्य

                                                                                         डॉ कविता व्यास [आयुर्वेदाचार्य]

      अंगेजी मे कहावत है कि prevention is better than cureआयुर्वेद भी इसी सिद्धांत को बताता है कि स्वास्थ की रक्षा करना अधिक महत्वपूर्ण है अपेक्षाकृत रोग का इलाज करवाने के। स्वास्थ्य रक्षा हेतु आयुर्वेद मेँ अनेक विधियाँ बताई गई है, उन सभी विधियोँ पर क्रमश: हम इस आर्टिकल के माध्यम से प्रकाश डालेंगे। इस बार हम ने विषय चुना है आहार और स्वास्थ्य । आयुर्वेद मेँ स्वास्थ्य के तीन उपस्तंभ कहे गए हैँ आहार निद्रा और ब्रम्हचर्य। आहार अपने आप मेँ बहुत ही महत्वपूर्ण विषय हैँ क्योंकि आप 80 प्रतिशत बीमारियोँ का इलाज सिर्फ आहार को ठीक कर लेने से कर सकते हैँ।

  • भोजन का समय

      सूर्योदय के साढ़े तीन से चार घंटे के बाद हमारा पाचन संस्थान बहुत अच्छी तरह से काम करता है, अत: हमेँ सुबह का नाश्ता 9.00से10.00 तक करना चाहिए और सबसे अधिक मात्रा मेँ करना चाहिए  क्योंकि उस समय हमारे पाचन संस्थान के पाचक तत्व बहुत अधिक मात्रा मेँ सविता होते हैँ इसलिए हमेँ बहुत अच्छी भूख लगती है। 

दोपहर का भोजन मध्यम मात्रा मेँ लेना चाहिए तथा रात्रि का भोजन हल्का होना चाहिए, क्योंकि सूर्यास्त के बाद हमारी  पाचक अग्नि बहुत ही मंद हो जाती है अत: सूर्यास्त के बाद भोजन कम लेना ही स्वास्थ के लिए उचित होता है। 

किसी देशी गाय को यदि सूर्यास्त के बाद भोजन दिया जाए तो वह भी भोजन ग्रहण नहीँ करती है।

ब) भोजन कैसा हो

भोजन बनने के 40 मिनट के अंदर- अंदर खा लेने से स्वास्थ के लिए सबसे उत्तम होता है, ताजा बना हुआ भोजन दो तीन घंटे तक ही सात्विक रहता है उसके पश्चात वह तामसिक मेँ परिवर्तित हो जाता है।

भोजन बनने के चौबीस घंटे बाद रखा हुआ भोजन जानवरोँ के खाने लायक भी नहीँ रहता है। रेफ्रिजरेटर मेँ रखा हुआ भोजन तो बहुत ही नुकसानदायक होता है क्योंकि उसमेँ जो गेस भोजन को ठंडा करती है वह बहुत नुकसानदायक होती है। 

) भोजन मेँ ध्यान रखने योग्य बातेँ

भोजन निर्धारित समय पर खाना चाहिए क्योंकि हमारा पाचन संस्थान मेँ उसी समय पर पाचक तत्व स्रवित होते है। 

ठंडा और गर्म भोज्य पदार्थ साथ मेँ नहीँ खाना चाहिए, जैसे आइसक्रीम और गरम गरम समोसा।

प्याज और दूध भी साथ मेँ नहीँ खाना चाहिए, क्योंकि सात्विक और तामसिक भोज्य पदार्थ  साथ मेँ नहीँ खाना चाहिए।

कटहल और दूध भी साथ मेँ नहीँ खाना चाहिए, क्योंकि इससे कफ बहुत ज्यादा बढ़ जाता है।

उसी तरह उड़द की दाल और दही भी साथ मेँ नहीँ खाना चाहिए।

भोजन और दूध पीने के मध्य एक से डेढ़ घंटे का अंतर होना चाहिए।

रात मेँ सिर्फ़ दही नहीँ खाना चाहिए और दिन मेँ भी दही मेँ शक्कर या काली मिर्च डाल कर खाना चाहिए।

जमीन पर बैठकर खाने से भोजन बहुत अच्छी तरह पचता है कुर्सी पर बैठकर खाने से उतना अच्छी तरह नहीँ पचता है।

भोजन के पश्चात वज्रासन मेँ पांच से 10 मिनिट बैठने से भोजन अच्छी तरह पचता है तथा बदहजमी एसिडिटी आदि बीमारियाँ नहीँ होती है। वज्रासन करने के पश्चात सो कदम टहलना चाहिए।

रात्रि के भोजन के पश्चात दो घंटे बाद ही सोना चाहिए भोजन के बाद रात्रि मेँ भी थोड़ा टहलता लेना अच्छा होता है।

भोजन के खाने के साथ साथ भोजन का पचना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है क्योंकि बिना पचा हुआ भोजन आम उत्पन्न करता है जो शरीर मेँ विभिन्न प्रकार के toxins पैदा करता है, आमरस [बायाँ पचा हुआ भोजन रस] से उत्पन्न हुए toxins हमारे शरीर के विभिन्न संस्थानोँ मेँ जाकर ब्लॉकेज पैदा करते हैँ जिससे कोलेस्ट्रॉल आर्थराइटिस हार्टअटैक आदि बीमारियोँ की संभावना बढ़ जाती है

लगातार कब्ज बने रहने से भी हमारे शरीर मेँ उपरोक्त बीमारियोँ के अतिरिक्त पइल्स आदि उत्पन्न हो सकते हैँ।

भोजन को अच्छी तरह चबा चबा कर खाने से हमारा लार (सलाईवा) भोजन मेँ मिलता है और वह भोजन को अच्छी तरह पचाने मेँ मदद करता है। हमारी भूख से एक रोटी कम खाने से हमारा पाचन अच्छी प्रकार होता है। 

भोजन के तुरंत बाद बहुत ज्यादा मात्रा मेँ पानी नहीँ पीना चाहिए सिर्फ एक या दो घूंट पानी ही गला साफ करने के लिए पी सकते हैँ।

क्योंकि हमारा भोजन का पाचन जब होता है तो पाचक अग्नि तीव्र रहती है और पानी पी लेने से पाचक अग्नि मंद पड़ सकती हैँ। भोजन के एक डेढ़ घंटे पश्चात और एक डेढ़ घंटे पूर्व पानी पिया जा सकता है।

भोजन के मध्य मेँ छाछ पीना पाचन के लिए बहुत अच्छा होता है।

अधिक तेल एवं घी य़ुक्त भोजन करने पर उसके बाद गर्म जल ही पीना चाहिए ठंडा जल पीने से गले मेँ कफ की वृद्धि हो सकती है।  गर्म जल पीने से हमारे शरीर का स्वास्थ्य वैसे भी अच्छा होता है अत सुबह खाली पेट या दिन मेँ जब भी इच्छा हो गर्म जल का उपयोग श्रेष्ठ है।

भोजन से संबंधित इन छोटी छोटी बातोँ का ध्यान रखने से डॉक्टरोँ को दिए जाने वाले हजारोँ रुपए के खर्चोँ को बचाया जा सकता है। [अधिक जानकारी के लिए यूट्यूब वीडियो देख सकते हैं,नीचे लिंक को क्लिक कीजिए] https://youtu.be/M76UxmzFIc0?si=goip18ka_VD6nRrU

द)  भोजन किसमेँ करे

भोजन यदि मिट्टी के पात्र मेँ पकाया जाता है तो स्वास्थ्य की दृष्टि से श्रेष्ठ होता हैँ। आज भी जगन्नाथपुरी मेँ भगवान का भोग मिट्टी के पात्र मेँ ही पकाया जाता है। 

एक शोध के पश्चात पता लगा है कि मिट्टी के पात्र मेँ पकाए गए भोजन के सूक्ष्म पोषक तत्व 100 प्रतिशत सुरक्षित रहते हैँ। कांसे एवँ पीतल के बर्तन मेँ पकाए हुए भोजन मेँ तीन से पांच प्रतिशत तक सूक्ष्म पोषक तत्व कम हो जाते हैँ फिर भी वह भोजन स्वास्थ के लिए उपयोगी ही होता है ।

एल्युमीनियम के बर्तन मेँ पकाया हुआ भोजन स्वास्थ के लिए बहुत ज्यादा हानिकारक होता है, क्योंकि उसमेँ सूक्ष्म पोषक तत्व 70 प्रतिशत समाप्त हो जाते हैँ। एल्युमीनियम के भोजन मेँ पकाए हुए एवम खाए हुए भोज्य पदार्थोँ से हमारे दिमाग के काम करने की क्षमता धीरे धीरे कम होती जाती है।स्टील के बर्तन एल्युमीनियम के बर्तनोँ की अपेक्षा बेहतर होते हैँ।

आयुर्वेद मेँ स्वास्थ्य हेतु भोजन पकाते समय सूर्य का प्रकाश एवँ हवा का स्पर्श भोजन के साथ होना अधिक आवश्यक होता है। प्रेशर कुकर मेँ पकाया हुआ भोजन मेँ ना तो सूर्य के प्रकाश और ना हवा का स्पर्श हो पाता है इसलिए उसके पोषक तत्व 90 प्रतिशत तक समाप्त हो जाते हैँ। 

प्रेशर कुकर की सीटी उतार कर बनाए हुए भोजन मेँ पोषक तत्व का नुकसान कम होता है। 

2 responses to “भोजन और स्वास्थ्य”

  1. Link exchange is nothing else however it is only
    placing the other person’s blog link on your page at suitable place and other
    person will also do same for you.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *